सुंदरता का पैमाना


✍️ अनिल रूषी तुलकाने

सुंदरता मात्र एक विचार है, देखने वाले की आँखों का,

हकीकत है या कोई वहम—बस खेल है ये परखने का।

हर कोई यहाँ अलग पैमाना लिए बैठा है इस बाज़ार में,

सुंदरता की परिभाषा को, अपनी सुविधा से गढ़ने में।

किसी को रंगों में मिलती, किसी को सादगी भाती है,

किसी को चेहरे में दिखती, किसी को रूह नज़र आती है।

जब हर चीज़ को मापने का, नियम बनाया है दुनिया ने,

फिर सुंदरता का आकलन, अलग क्यों रखा हर किसी ने?

सच तो ये है ऐ दोस्त, नापी नहीं जाती ये तराज़ू से,

ये तो एहसास है दिल का, जो झलकता है हर एक अंदाज़ू से।

जो दिखता है वो अधूरा है, जो महसूस हो वही सच्चा है,

सुंदरता चेहरों में कम, इंसानियत में ज्यादा अच्छा है।

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