घर की परी
✍️ अनिल रूषी तुलकाने
हर पिता की अनमोल दौलत है उसकी प्यारी परी,
सपने संजोए, देखभाल करे—वो सबसे सच्ची, सबसे खरी।
स्कूल भी संभाले, घर में माँ का हाथ बँटाए,
अपने सुख भूलकर हर पल अपनों को अपनाए।
अरमान उसके—अपने घर को स्वर्ग बनाए,
पराए घर को भी अपना मान, वहाँ खुशियाँ सजाए।
किताबों की लौ दिल में, पढ़ाई का अटूट जोश,
आगे बढ़कर जग को रोशन करने का उसमें होश।
हर रिश्ता वो दिल से निभाए, हर दर्द को चुपचाप सहे,
मुस्कान में अपने सारे आँसू, दुनिया से छुपाकर रखे।
बेटी का ये त्याग और प्यार जो समझ न पाए,
यकीनन इस दुनिया में वो इंसान अज्ञान ही कहलाए।
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