उड़ान का हौसला

 शीर्षक: “उड़ान का हौसला”

✍️ अनिल रूषी तुलकाने

उड़ने के लिए पंख तो होते हैं,

पर उड़ाने के लिए जोश चाहिए,

सपने सामने डेरा डाले हैं,

पर उन्हें छूने का हौसला चाहिए।

आसमान तो बहुत बड़ा है,

बस फड़फड़ाने को मन चाहिए,

मंज़िलें खुद रास्ता दिखा देंगी,

अगर समझने को अक्ल चाहिए।

हवा भी साथ देती है उसी का,

जिसमें आगे बढ़ने का इरादा हो,

वरना पंख होते हुए भी कई लोग,

ज़मीन पर ही रह जाते हैं—ये भी एक सच्चा फसाना हो।

डर की दीवारें तो हर किसी के रास्ते में आती हैं,

पर जो पार कर जाए वही असली उड़ान पाता है,

ख्वाब तो सबके पास होते हैं इस दुनिया में,

पर उन्हें जीने का साहस हर किसी में कहाँ आता है।

गिरकर संभलना ही असली हुनर है,

यही जिंदगी का असली सबक सिखाता है,

जो खुद पर यकीन कर ले एक बार,

वही आसमान में अपना नाम लिख जाता है

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