✍️ अनिल रूषी तुलकाने सुंदरता मात्र एक विचार है, देखने वाले की आँखों का, हकीकत है या कोई वहम—बस खेल है ये परखने का। हर कोई यहाँ अलग पैमाना लिए बैठा है इस बाज़ार में, सुंदरता की परिभाषा को, अपनी सुविधा से गढ़ने में। किसी को रंगों में मिलती, किसी को सादगी भाती है, किसी को चेहरे में दिखती, किसी को रूह नज़र आती है। जब हर चीज़ को मापने का, नियम बनाया है दुनिया ने, फिर सुंदरता का आकलन, अलग क्यों रखा हर किसी ने? सच तो ये है ऐ दोस्त, नापी नहीं जाती ये तराज़ू से, ये तो एहसास है दिल का, जो झलकता है हर एक अंदाज़ू से। जो दिखता है वो अधूरा है, जो महसूस हो वही सच्चा है, सुंदरता चेहरों में कम, इंसानियत में ज्यादा अच्छा है।
✍️ अनिल रूषी तुलकाने कोशिश कर या न कर, यहाँ नसीब का भी खेल होता है, किसी को सजी थाल मिलती है, तो किसी का सब कुछ बिखर जाता है। पर गौर से देख ऐ दोस्त, संघर्ष दोनों का एक-सा होता है, कोई अपनी थाल सजाने को, तो कोई उसे बचाने को लड़ता है। फासले रास्तों के अलग सही, पर पसीना दोनों का सच्चा है, मंज़िल पाने की हो या उसे बचाने की—हर कदम पर संघर्ष सच्चा है। किसी के हाथों में उम्मीदें हैं, तो कोई यादों को थामे रहता है, कोई भविष्य के लिए लड़ता है, तो कोई आज को संभाले रहता है। ये ज़िंदगी एक रणभूमि है, यहाँ हर कोई योद्धा बनता है, जीत किसी की भी हो जाए, पर संघर्ष सबका एक-सा लगता है।
✍️ अनिल रूषी तुलकाने हर पिता की अनमोल दौलत है उसकी प्यारी परी, सपने संजोए, देखभाल करे—वो सबसे सच्ची, सबसे खरी। स्कूल भी संभाले, घर में माँ का हाथ बँटाए, अपने सुख भूलकर हर पल अपनों को अपनाए। अरमान उसके—अपने घर को स्वर्ग बनाए, पराए घर को भी अपना मान, वहाँ खुशियाँ सजाए। किताबों की लौ दिल में, पढ़ाई का अटूट जोश, आगे बढ़कर जग को रोशन करने का उसमें होश। हर रिश्ता वो दिल से निभाए, हर दर्द को चुपचाप सहे, मुस्कान में अपने सारे आँसू, दुनिया से छुपाकर रखे। बेटी का ये त्याग और प्यार जो समझ न पाए, यकीनन इस दुनिया में वो इंसान अज्ञान ही कहलाए।
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